
प्रियपाठको,
सप्रेम नमस्कार।
खेती आज एक ऐसे दौर से गुज़र रही है जहाँ सवाल केवल पैदावार का नहीं, बल्कि मिट्टी, पानी, पर्यावरण और परिवार की सेहत का भी है। पिछले अंक में हमने ‘रसायन छोड़ो, मिट्टी से नाता जोड़ो’ के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया था कि रासायनिक खेती हमें किस दिशा में ले जा रही है।
खेती आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। उत्पादन तो मिलता है, लेकिन रसायनों के लगातार प्रयोग से मिट्टी की सेहत, पानी की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में रसायन-मुक्त खेती सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत बन गई है।
अक्सर किसान यह सोचता है कि रसायन-मुक्त खेती करना बहुत कठिन है, जोखिम भरा है और इसके लिए एक साथ सब कुछ छोड़ना पड़ेगा। जबकि सच्चाई यह है कि रसायन-मुक्त खेती की शुरुआत छोटे-छोटे समझदारी भरे कदमों से होती है। सोच में बदलाव, रसायनों का धीरे-धीरे कम उपयोग, मिट्टी को ज़िंदा करना और देसी उपायों को अपनाना — यही इस यात्रा की सही शुरुआत है।
इस अंक में हम उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए बात कर रहे हैं रसायन-मुक्त खेती की ओर अगले कदम की। आइए जानते हैं कि रसायन-मुक्त खेती की शुरुआत कैसे की जानी चाहिए, इस दिशा में पहला कदम क्या होना चाहिए।
पहला कदम खेत से नहीं, सोच से शुरू होता है।
रसायन-मुक्त खेती की शुरुआत सबसे पहले किसान की सोच से होती है।
जब आप यह ठान लेते हैं कि:
• बिना यूरिया और डीएपी भी खेती संभव है,
• मिट्टी एक जीवित तंत्र है,
• अब बदलाव समय की माँग है,
तभी सही मायने में पहला कदम उठता है।
सब कुछ एक साथ न छोड़ें।
कई बार किसान सोचते हैं कि रसायन छोड़ते ही नुकसान होगा। इसलिए पहला व्यावहारिक कदम यह है:
• पूरी ज़मीन पर नहीं, पहले एक हिस्से या एक फसल में प्रयोग करें,
• यूरिया-डीएपी की मात्रा धीरे-धीरे घटाएँ,
• साथ में जैविक इनपुट जैसे गोबर, कम्पोस्ट और जीवामृत अपनाएँ।
धीरे-धीरे बदलाव ही स्थायी होता है।

मिट्टी को ज़िंदा करना ज़रूरी
रसायन-मुक्त खेती की असली ताकत है स्वस्थ मिट्टी।
• फसल अवशेष को जलाने की बजाय मिट्टी में मिलाएँ,
• खेत खाली न छोड़ें, हमेशा कुछ न कुछ उगाएँ,
• देसी खाद और जीवामृत का प्रयोग करें।
जैसे-जैसे मिट्टी में जीवन बढ़ेगा, फसल भी मज़बूत होगी।
सीखना और जुड़ना भी पहला कदम है।
जो किसान पहले से रसायन-मुक्त खेती कर रहे हैं, उनसे सीखें।
• उनके खेत देखें, अनुभव साझा करें,
• गलतियों से डरें नहीं, धैर्य रखें।
रसायन-मुक्त खेती कोई एक दिन की योजना नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है।
रसायन-मुक्त खेती की ओर पहला कदम दरअसल सोच, समझ और छोटे-छोटे प्रयासों का मेल है। आज से ही ये छोटे-छोटे प्रयास आरंभ करें, ताकि कल पूरी तरह रसायन-मुक्त, स्वस्थ और टिकाऊ खेती संभव हो सके।
हर सीजन खेती के लिए तैयारी और दिशा तय करने का होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हर अंक में हम ऐसे लेख, अनुभव और सुझाव शामिल करते हैं, जो किसान को डर से नहीं, भरोसे से आगे बढ़ने की प्रेरणा दें।
हमारा उद्देश्य किसी पर दबाव डालना नहीं, बल्कि यह विश्वास जगाना है कि जहर -मुक्त खेती संभव है, लाभकारी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज़रूरी है।
आइए, मिलकर खेती को ज़हर से नहीं, जीवन से जोड़ें।
पवन नागर, संपादक




